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Success Stories

Celebrating members who cleared government, banking, and competitive exams.

Sachin Kumar
Sachin Kumar
Rajasthan police · Rajasthan police 2025
सफलता की कहानी

मेरा नाम सचिन कुमार है। मैं राजस्थान के गांव बगथर, तहसील बसेड़ी, जिला धौलपुर का निवासी हूँ। एक साधारण किसान परिवार में जन्म लेकर मैंने बचपन से ही एक सपना देखा था — राजस्थान पुलिस में भर्ती होकर देश और समाज की सेवा करना।

मेरे गांव में सुविधाएँ कम थीं, लेकिन हौसले बहुत बड़े थे। मैंने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई की। सुबह जल्दी उठकर दौड़ लगाना, दिन में पढ़ाई करना और रात को मेहनत दोहराना — यही मेरी दिनचर्या (Daily Routine – दैनिक कार्यक्रम) बन गई थी।

कई बार असफलता (Failure – असफलता) भी मिली, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मेरे जीवन में सबसे बड़ा मार्गदर्शन (Guidance – मार्गदर्शन) हमारे आदरणीय CEO साहब Nivrutti Somnath Avhad (IAS) जी का रहा।

उनकी शिक्षा के प्रति लगन और प्रेरणा (Motivation – प्रेरणा) ने मुझे हमेशा आगे बढ़ने की ताकत दी। उन्होंने मुझे सिखाया कि “मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।”

आज जब मेरा चयन राजस्थान पुलिस में हुआ है, तो यह केवल मेरी नहीं बल्कि मेरे परिवार, मेरे गांव और मेरे गुरुजनों की जीत है।

मैं अपने माता-पिता के आशीर्वाद और CEO साहब सोमनाथ जी के मार्गदर्शन के लिए हृदय की गहराइयों से धन्यवाद (Thank you – धन्यवाद) करता हूँ।

मैं वचन देता हूँ कि मैं ईमानदारी (Honesty – ईमानदारी) और निष्ठा (Dedication – निष्ठा) के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करूँगा और अपने जिले धौलपुर व राजस्थान का नाम रोशन करूँगा।

संदेश: “सपने वही सच होते हैं, जिनके लिए मेहनत सच्ची होती है।”

मैं, SBI Cards, Eco Needs Foundation और उसके संस्थापक डॉ. प्रियानंद आगळे सर, देवेंद्र सिंह जी तथा पंचायती राज विभाग धौलपुर और इससे जुड़े सभी लोगों का दिल की गहराइयों से धन्यवाद करता हूँ।

Library: बाघथर
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Raghvendra Singh
Raghvendra Singh
Indian Army · Indian Army 2025

यह कहानी Raghvendra Singh नाम के एक मेहनती और देशभक्त युवक की है। Raghvendra एक साधारण परिवार से आते हैं। वे राजस्थान के धौलपुर जिले की बसेड़ी तहसील के बघथर गाँव के निवासी हैं।

बचपन से ही उनके मन में Indian Army (भारतीय सेना) में जाने का सपना था। उन्हें देश से बहुत प्रेम था और वे देश की सेवा करना चाहते थे।

Raghvendra रोज़ सुबह जल्दी उठकर Running (दौड़) करते थे। उन्होंने Physical Fitness (शारीरिक फिटनेस) के साथ-साथ पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान दिया। कई बार Recruitment Exam (भर्ती परीक्षा) कठिन लगी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

पहली बार में उनका चयन नहीं हुआ, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी कमज़ोरियों पर काम किया और दोबारा पूरी मेहनत और अनुशासन के साथ तैयारी शुरू की। उनके परिवार ने भी हर कदम पर उनका साथ दिया।

आख़िरकार Raghvendra की मेहनत सफल हुई और उनका चयन Indian Army में हो गया। Training (प्रशिक्षण) पूरी करने के बाद वे एक अनुशासित और साहसी सैनिक बने। आज वे पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं।

सीख (Message – संदेश)

Raghvendra की कहानी हमें सिखाती है कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। जो कभी हार नहीं मानता, वही सफल होता है।

यह सब हमारे CEO साहब Nivrutti Somnath Avhad (IAS)  की शिक्षा के प्रति रुचि और उनकी मेहनत की वजह से संभव हो पाया है। उन्हीं के प्रयास से हमारे गाँव में लाइब्रेरी खुली है।

मैं, Raghvendra Singh, SBI Cards, Eco Needs Foundation और उसके संस्थापक डॉ. प्रियानंद आगळे सर, देवेंद्र सिंह जी तथा पंचायती राज विभाग धौलपुर और इससे जुड़े सभी लोगों का दिल की गहराइयों से धन्यवाद करता हूँ।

Library: बाघथर
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Rampujan Singh
Rampujan Singh
Indian Army · Indian Army 2025

नमस्ते! मैं रामपूजन सिंह, राजस्थान के धौलपुर जिले की बसेड़ी तहसील के एक छोटे से गाँव बघथर का रहने वाला हूँ। आज जब मैं आईने में खुद को भारतीय सेना की इस गौरवशाली वर्दी में देखता हूँ, तो पीछे मुड़कर देखने पर संघर्ष की वो सारी धूल धुंधली पड़ जाती है।

मेरी सफलता की कहानी: बघथर से सरहद तक

मेरा जन्म और पालन-पोषण चंबल के उसी आँचल में हुआ जहाँ की हवाओं में ही बहादुरी है। धौलपुर की रेतीली और पथरीली जमीन पर चलते हुए मैंने बचपन से ही सेना के जवानों को सम्मान की नजर से देखा। मेरे लिए वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं, एक जज़्बा थी।

तैयारी का दौर
  • सुबह 4 बजे की दौड़: जब पूरा गाँव सो रहा होता था, तब मैं बघथर की पगडंडियों पर अपनी साँसों से लड़ रहा होता था।
  • पसीने से सींची मेहनत: कड़ी धूप हो या कड़ाके की ठंड, मैंने कभी अपनी रनिंग मिस नहीं की। कई बार पैर जवाब दे जाते थे, लेकिन दिल कहता था, “बस एक कदम और!”
  • किताबों से दोस्ती: फिजिकल के साथ-साथ मैंने लिखित परीक्षा के लिए भी रात-रात भर पढ़ाई की, क्योंकि लक्ष्य बड़ा था और मुकाबला कड़ा।
वो पल जिसने सब बदल दिया

भर्ती रैली में हजारों की भीड़ थी। हर कोई दौड़ रहा था, लेकिन मेरी आँखों के सामने सिर्फ मेरे माता-पिता का चेहरा और मेरे गाँव बघथर का नाम था। जब मैंने फिनिशिंग लाइन पार की, तो वह सिर्फ एक दौड़ की जीत नहीं थी, वह मेरे सपनों की उड़ान थी।

जब फाइनल सूची में मैंने अपना नाम “रामपूजन सिंह” देखा, तो मेरी आँखों में आँसू थे। वह खुशी केवल मेरी नहीं थी, वह मेरे पूरे परिवार और गाँव की जीत थी।

वर्दी की शान

आज मैं भारतीय सेना का हिस्सा हूँ। ट्रेनिंग की कठोरता ने मुझे और भी फौलादी बना दिया है। जब मैं छुट्टी पर अपनी वर्दी पहनकर गाँव की गलियों से गुजरता हूँ और छोटे बच्चे मुझे सैल्यूट करते हैं, तो महसूस होता है कि मेरी मेहनत सफल हो गई।

मेरा संदेश
बसेड़ी और धौलपुर के मेरे छोटे भाइयों, याद रखना—किस्मत साथ दे या न दे, लेकिन कड़ी मेहनत कभी धोखा नहीं देती। अगर बघथर का एक लड़का भारतीय सेना में जा सकता है, तो आप भी जा सकते हैं।

यह सब हमारे CEO साहब Nivrutti Somnath Avhad (IAS)  की शिक्षा के प्रति रुचि और उनकी मेहनत की वजह से संभव हो पाया है। उन्हीं के प्रयास से हमारे गाँव में लाइब्रेरी खुली।

मैं रामपूजन सिंह, SBI Cards, Eco Needs Foundation और उसके संस्थापक डॉ. प्रियानंद आगळे सर, देवेंद्र सिंह जी तथा पंचायती राज विभाग धौलपुर और इससे जुड़े सभी लोगों का दिल की गहराइयों से धन्यवाद करता हूँ।

“रगों में धौलपुर का खून और दिल में हिंदुस्तान है, बघथर की मिट्टी का बेटा, अब सेना की शान है।”

जय हिंद
रामपूजन सिंह

Library: बाघथर
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Lavkush Gurjar
Lavkush Gurjar
Indian Army · Indian Army 2025

मेरा नाम लवकुश है। मैं गाँव खानपुरा, तहसील बसेरी, ज़िला धौलपुर, राजस्थान का निवासी हूँ। मेरा सपना बचपन से ही Indian Army (भारतीय सेना) में जाकर देश की सेवा करना था।

हमारे गाँव में सुविधाएँ कम थीं, लेकिन हौसले और मेहनत की कोई कमी नहीं थी। मैं एक साधारण परिवार से हूँ। मेरे माता-पिता किसान हैं। उन्होंने मुझे हमेशा ईमानदारी, अनुशासन और मेहनत का महत्व सिखाया।

स्कूल के दिनों से ही मुझे दौड़ना, व्यायाम करना और अनुशासित जीवन पसंद था। जब भी सेना की वर्दी में जवानों को देखता था, मन में एक ही बात आती थी – एक दिन मैं भी यह वर्दी पहनूँगा।

मैंने रोज़ सुबह जल्दी उठकर Physical Training (फिजिकल ट्रेनिंग – शारीरिक अभ्यास) शुरू किया। दौड़, पुश-अप, सिट-अप और लंबी कूद का नियमित अभ्यास किया। साथ-साथ मैंने Written Exam (लिखित परीक्षा) की तैयारी भी की। कई बार असफलता मिली, लेकिन मैंने हार नहीं मानी।

सेना भर्ती के दिन मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ गया। Physical Test (शारीरिक परीक्षा), Medical Test (चिकित्सा परीक्षण) और लिखित परीक्षा – सभी चरणों को मैंने पूरी मेहनत और विश्वास के साथ पूरा किया। आखिरकार वह दिन आया जब मेरा नाम Indian Army की चयन सूची में था। यह मेरे जीवन का सबसे गर्व का क्षण था।

आज मैं गर्व से कह सकता हूँ कि मैं Indian Army का एक जवान हूँ। मेरी यह सफलता मेरे माता-पिता, गुरुजनों और मेरी कड़ी मेहनत का परिणाम है। मेरी कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे गाँव से बड़े सपने देखते हैं।

यह सब हमारे CEO साहब Nivrutti Somnath Avhad (IAS) की शिक्षा के प्रति रुचि और उनकी मेहनत की वजह से संभव हो पाया है। उन्हीं के प्रयास से हमारी लाइब्रेरी खुली है।

मैं, SBI Cards, Eco Needs Foundation और उसके संस्थापक डॉ. प्रियानंद आगळे सर, देवेंद्र सिंह जी तथा पंचायती राज विभाग धौलपुर और इससे जुड़े सभी लोगों का दिल की गहराइयों से धन्यवाद करता हूँ।

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