Success Story

Rampujan Singh

Indian Army · Indian Army 2025

बाघथर

Rampujan Singh

नमस्ते! मैं रामपूजन सिंह, राजस्थान के धौलपुर जिले की बसेड़ी तहसील के एक छोटे से गाँव बघथर का रहने वाला हूँ। आज जब मैं आईने में खुद को भारतीय सेना की इस गौरवशाली वर्दी में देखता हूँ, तो पीछे मुड़कर देखने पर संघर्ष की वो सारी धूल धुंधली पड़ जाती है।

मेरी सफलता की कहानी: बघथर से सरहद तक

मेरा जन्म और पालन-पोषण चंबल के उसी आँचल में हुआ जहाँ की हवाओं में ही बहादुरी है। धौलपुर की रेतीली और पथरीली जमीन पर चलते हुए मैंने बचपन से ही सेना के जवानों को सम्मान की नजर से देखा। मेरे लिए वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं, एक जज़्बा थी।

तैयारी का दौर

  • सुबह 4 बजे की दौड़: जब पूरा गाँव सो रहा होता था, तब मैं बघथर की पगडंडियों पर अपनी साँसों से लड़ रहा होता था।
  • पसीने से सींची मेहनत: कड़ी धूप हो या कड़ाके की ठंड, मैंने कभी अपनी रनिंग मिस नहीं की। कई बार पैर जवाब दे जाते थे, लेकिन दिल कहता था, “बस एक कदम और!”
  • किताबों से दोस्ती: फिजिकल के साथ-साथ मैंने लिखित परीक्षा के लिए भी रात-रात भर पढ़ाई की, क्योंकि लक्ष्य बड़ा था और मुकाबला कड़ा।

वो पल जिसने सब बदल दिया

भर्ती रैली में हजारों की भीड़ थी। हर कोई दौड़ रहा था, लेकिन मेरी आँखों के सामने सिर्फ मेरे माता-पिता का चेहरा और मेरे गाँव बघथर का नाम था। जब मैंने फिनिशिंग लाइन पार की, तो वह सिर्फ एक दौड़ की जीत नहीं थी, वह मेरे सपनों की उड़ान थी।

जब फाइनल सूची में मैंने अपना नाम “रामपूजन सिंह” देखा, तो मेरी आँखों में आँसू थे। वह खुशी केवल मेरी नहीं थी, वह मेरे पूरे परिवार और गाँव की जीत थी।

वर्दी की शान

आज मैं भारतीय सेना का हिस्सा हूँ। ट्रेनिंग की कठोरता ने मुझे और भी फौलादी बना दिया है। जब मैं छुट्टी पर अपनी वर्दी पहनकर गाँव की गलियों से गुजरता हूँ और छोटे बच्चे मुझे सैल्यूट करते हैं, तो महसूस होता है कि मेरी मेहनत सफल हो गई।

मेरा संदेश

बसेड़ी और धौलपुर के मेरे छोटे भाइयों, याद रखना—किस्मत साथ दे या न दे, लेकिन कड़ी मेहनत कभी धोखा नहीं देती। अगर बघथर का एक लड़का भारतीय सेना में जा सकता है, तो आप भी जा सकते हैं।

यह सब हमारे CEO साहब Nivrutti Somnath Avhad (IAS)  की शिक्षा के प्रति रुचि और उनकी मेहनत की वजह से संभव हो पाया है। उन्हीं के प्रयास से हमारे गाँव में लाइब्रेरी खुली।

मैं रामपूजन सिंह, SBI Cards, Eco Needs Foundation और उसके संस्थापक डॉ. प्रियानंद आगळे सर, देवेंद्र सिंह जी तथा पंचायती राज विभाग धौलपुर और इससे जुड़े सभी लोगों का दिल की गहराइयों से धन्यवाद करता हूँ।

“रगों में धौलपुर का खून और दिल में हिंदुस्तान है, बघथर की मिट्टी का बेटा, अब सेना की शान है।”

जय हिंद
रामपूजन सिंह

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