Lavkush Gurjar
Indian Army · Indian Army 2025
बाघथर
मेरा नाम लवकुश है। मैं गाँव खानपुरा, तहसील बसेरी, ज़िला धौलपुर, राजस्थान का निवासी हूँ। मेरा सपना बचपन से ही Indian Army (भारतीय सेना) में जाकर देश की सेवा करना था।
हमारे गाँव में सुविधाएँ कम थीं, लेकिन हौसले और मेहनत की कोई कमी नहीं थी। मैं एक साधारण परिवार से हूँ। मेरे माता-पिता किसान हैं। उन्होंने मुझे हमेशा ईमानदारी, अनुशासन और मेहनत का महत्व सिखाया।
स्कूल के दिनों से ही मुझे दौड़ना, व्यायाम करना और अनुशासित जीवन पसंद था। जब भी सेना की वर्दी में जवानों को देखता था, मन में एक ही बात आती थी – एक दिन मैं भी यह वर्दी पहनूँगा।
मैंने रोज़ सुबह जल्दी उठकर Physical Training (फिजिकल ट्रेनिंग – शारीरिक अभ्यास) शुरू किया। दौड़, पुश-अप, सिट-अप और लंबी कूद का नियमित अभ्यास किया। साथ-साथ मैंने Written Exam (लिखित परीक्षा) की तैयारी भी की। कई बार असफलता मिली, लेकिन मैंने हार नहीं मानी।
सेना भर्ती के दिन मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ गया। Physical Test (शारीरिक परीक्षा), Medical Test (चिकित्सा परीक्षण) और लिखित परीक्षा – सभी चरणों को मैंने पूरी मेहनत और विश्वास के साथ पूरा किया। आखिरकार वह दिन आया जब मेरा नाम Indian Army की चयन सूची में था। यह मेरे जीवन का सबसे गर्व का क्षण था।
आज मैं गर्व से कह सकता हूँ कि मैं Indian Army का एक जवान हूँ। मेरी यह सफलता मेरे माता-पिता, गुरुजनों और मेरी कड़ी मेहनत का परिणाम है। मेरी कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे गाँव से बड़े सपने देखते हैं।
यह सब हमारे CEO साहब Nivrutti Somnath Avhad (IAS) की शिक्षा के प्रति रुचि और उनकी मेहनत की वजह से संभव हो पाया है। उन्हीं के प्रयास से हमारी लाइब्रेरी खुली है।
मैं, SBI Cards, Eco Needs Foundation और उसके संस्थापक डॉ. प्रियानंद आगळे सर, देवेंद्र सिंह जी तथा पंचायती राज विभाग धौलपुर और इससे जुड़े सभी लोगों का दिल की गहराइयों से धन्यवाद करता हूँ।